गुरुवार, 26 जून 2008


हिंदुस्तान में सब होता है लेकिन वंहा नहीं


जम्मू कश्मीर सरकार द्वारा श्री अमरनाथ श्रायन बोर्ड को यात्रियों को सुविधाएं देने के लिए बालटाल में थोड़ी ज़मीन क्या दे दी मानों आसमान टूट पड़ा हो.....जो बवाल अलगाववादियों ने यां हम तो कहेंगे आतंकवादियों ने मचाया हद कर दी.....लेकिन ये सिर्फ हिंदुस्तान में ही होता है जनाब सीमा पार पाकिस्तान में नहीं....क्या कोई सोच सकता है कि पाकिस्तान में पाक प्रशासन अगर हज कमेटी को कंही कोई ज़मीन का टुकड़ा दे तो पाकिस्तान में इतना बवाल हो जाए.....शायद वंहा ऐसा करने की हिम्मत किसी में नही क्योंकि वंहा न तो प्रशासन उसे बख्शेगा और न ही आवाम.....लेकिन यंहा ऐसा कुछ नही है.....यंहा अगर श्री अमरनाथ श्रायन बोर्ड को थोड़ी ज़मीन दे दी जाती है तो उस पर सभी को एतराज है.....सभी बड़े नेताओें को भी नेता....वो नेता जिनकी कश्मीर में औकात दो कोड़ी से ज़्यादा नही है.....कभी ज़िंदगी में चुनाव तो लड़े नही और अगर लड़े तो शायद ज़मानत भी न बच पाए.........नेता जो खाते यंहा की है और गुण गाते है पाकिस्तान के.....कश्मीरी पंड़ितों का आरोप है गुलाम नबी आज़ाद ने वैसे तो आज तक कश्मीरी पंड़ितों के लिए कुछ नही किया....लगा ये यात्रियों के लिए न काफी ज़मीन देकर कुछ मरहम लगाने का काम ज़रूर किया जा रहा है....लेकिन वो भी वंहा के नेताओं को रास नही आया....कंस्ट्रक्शन का काम रूकवा कर ही दम लिया......जिन नेताओं ने इसका विरोध किया है....अगर उनमें हिम्मत है तो राज्य में अपनी सरकार क्यों नहीं बना लेते.....एक बार चुनाव मैदान में उतरे तो सही वोटिंग से पहले ही औकात समझ में आ जाएगी....कश्मिरियों के हिमायती होने का दम भरते है....और गोद में बैठते है पाकिस्तान की.....खाना पीना चलना फिरना सोना जागना दिन रात सब पाकिस्तान के इशारे पर.....लेकिन एक बात जग ज़ाहिर है कि जिस थाली में खाओ उसमें छेद तो भले ही कर दो लेकिन थूको मत......कश्मीरी आवाम को भी सोचना चाहिए कि उनके पास सिर्फ टूरिज़्म के अलावा रोज़ी रोटी कमाने का कोई और ज़रिया नही है....ऐसे में हर साल वंहा लाखों की तादाद में अमरनाथ यात्री आते है......जिससे राज्य सरकार को करोडों रुपयों की आमदनी होती है....ऐसे में अगर थोड़ी सी ज़मीन तीर्थयात्रियों के लिए मुहैय्या करवा भी दी गई है तो कौन सा आसमान टूट पड़ा.....लेकिन ये हिंदुस्तान है यंहा कुछ भी हो सकता है.......सरकारें आतंकवादी और दो दो कौड़ी के नेताओं के सामने झूक सकती है.....अपना फैसला कुछ लोगों की हिंसा की वजह से बदल सकती है......ड़र सकती है......हक की बात नही कर सकती है.....क्योंकि ये भारत है यंहा कुछ भी हो सकता है...

सोमवार, 2 जून 2008


नही लगता कि सज़ा कम है ?



विकास और विशाल यादव को नीतिश कटारा की हत्या का दोषी पाया गया....दफा ३०२ के तहत उन्हे दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत ने दोषी मानते हुए ताउम्र कैद की सज़ा सुनाई है....लेकिन जिस तरीके का जुर्म इन दोनों ने किया उसे रेयर ऑफ द रेयररेस्ट क्यों नही माना गया....हालांकि कोर्ट के फैसले पर कुछ लिखना बोलना ठीक नही क्योंकि जो कोर्ट ने किया वो सही है....लेकिन इन दोनों के साथ साथ डी पी यादव का रूतबा और विकास और विशाल का घमंड़ ज़रूर टूटा होगा...क्योंकि सभी का ये कहना कि अगर ये मामला उत्तर प्रदेश की किसी कोर्ट में चलता तो इन लोगों का कोई कुछ भी नही बिगाड़ सकता था....क्योंकि डी पी यादव का दबदबा कितना है सभी जानते है....लेकिन विकास यादव और विशाल को जब भी कोर्ट में लाया तो साफ तौलिये और दूधियां रंग के कपड़े शेव बनी हुई नहाए धोए लगते थे साथ में पुलिस वालों के साथ चलने में अपने आप को वो किसी सेलिब्रिटी से कम नही समझते थे.....और कोर्ट परिसर में पत्रकारों से मारपीट और बदतमीज़ी सभी ने देखी है....शायद ये पिता का रूतबा और पैसे का घमंड़ था.....लेकिन वो ये भूल गए कि घमंड़ तो रावण का भी नही रहा....अब जबकि निचली अदालत का फैसला उम्रकैद आ गया है....तब जाकर कंही डी पी यादव के चेहरे की हवाईयां भी उड़ी हुई दिखाई दी और उसके बददिमाग रईसज़ादों के चेहरे पर भी सारी उम्र जेल में रहने का ड़र सताने लगा...लेकिन उस मां ने अदालत के फैसले को सही ठहराया जिसमें कहा गया...उसके बेटे को ज़िंदा जलाने और इकलौटे बेटों को अपने गुस्से में आकर खत्म कर देने वालों को उम्रकैद लेकिन जब ये फैसला आया तो कोर्ट परिसर में कई लोग बोल उठे बच गए साले.....इनको तो लटका देना चाहिए था.....उस मां की भी जमकर तारीफ की गई....जिसने किसी बात की परवाह नही की और लड़ी पूरे सिस्टम से बाहुबलियों से लेकिन हार नही मानी....फिर धीरे धीरे सिस्टम मीडिया सब साथ हो लिए और जीत गई सच्चाई क्या लगता है आपको ये सज़ा काफी है एक सवाल जो पढ़े अपनी राय ज़रूर दें........















अगर गर्मी से परेशान हों तो इन तस्वीरों पर नज़र डालें शायद कुछ मन को छुने वाली और सुकून देने वाली तस्वीरें लगें....पिछले दिनों ही चक्कर लगा रोहतांग पास जंहा का दर्रा बर्फ से पूरी तरह ढ़का हुआ है......