
हिंदुस्तान में सब होता है लेकिन वंहा नहीं
जम्मू कश्मीर सरकार द्वारा श्री अमरनाथ श्रायन बोर्ड को यात्रियों को सुविधाएं देने के लिए बालटाल में थोड़ी ज़मीन क्या दे दी मानों आसमान टूट पड़ा हो.....जो बवाल अलगाववादियों ने यां हम तो कहेंगे आतंकवादियों ने मचाया हद कर दी.....लेकिन ये सिर्फ हिंदुस्तान में ही होता है जनाब सीमा पार पाकिस्तान में नहीं....क्या कोई सोच सकता है कि पाकिस्तान में पाक प्रशासन अगर हज कमेटी को कंही कोई ज़मीन का टुकड़ा दे तो पाकिस्तान में इतना बवाल हो जाए.....शायद वंहा ऐसा करने की हिम्मत किसी में नही क्योंकि वंहा न तो प्रशासन उसे बख्शेगा और न ही आवाम.....लेकिन यंहा ऐसा कुछ नही है.....यंहा अगर श्री अमरनाथ श्रायन बोर्ड को थोड़ी ज़मीन दे दी जाती है तो उस पर सभी को एतराज है.....सभी बड़े नेताओें को भी नेता....वो नेता जिनकी कश्मीर में औकात दो कोड़ी से ज़्यादा नही है.....कभी ज़िंदगी में चुनाव तो लड़े नही और अगर लड़े तो शायद ज़मानत भी न बच पाए.........नेता जो खाते यंहा की है और गुण गाते है पाकिस्तान के.....कश्मीरी पंड़ितों का आरोप है गुलाम नबी आज़ाद ने वैसे तो आज तक कश्मीरी पंड़ितों के लिए कुछ नही किया....लगा ये यात्रियों के लिए न काफी ज़मीन देकर कुछ मरहम लगाने का काम ज़रूर किया जा रहा है....लेकिन वो भी वंहा के नेताओं को रास नही आया....कंस्ट्रक्शन का काम रूकवा कर ही दम लिया......जिन नेताओं ने इसका विरोध किया है....अगर उनमें हिम्मत है तो राज्य में अपनी सरकार क्यों नहीं बना लेते.....एक बार चुनाव मैदान में उतरे तो सही वोटिंग से पहले ही औकात समझ में आ जाएगी....कश्मिरियों के हिमायती होने का दम भरते है....और गोद में बैठते है पाकिस्तान की.....खाना पीना चलना फिरना सोना जागना दिन रात सब पाकिस्तान के इशारे पर.....लेकिन एक बात जग ज़ाहिर है कि जिस थाली में खाओ उसमें छेद तो भले ही कर दो लेकिन थूको मत......कश्मीरी आवाम को भी सोचना चाहिए कि उनके पास सिर्फ टूरिज़्म के अलावा रोज़ी रोटी कमाने का कोई और ज़रिया नही है....ऐसे में हर साल वंहा लाखों की तादाद में अमरनाथ यात्री आते है......जिससे राज्य सरकार को करोडों रुपयों की आमदनी होती है....ऐसे में अगर थोड़ी सी ज़मीन तीर्थयात्रियों के लिए मुहैय्या करवा भी दी गई है तो कौन सा आसमान टूट पड़ा.....लेकिन ये हिंदुस्तान है यंहा कुछ भी हो सकता है.......सरकारें आतंकवादी और दो दो कौड़ी के नेताओं के सामने झूक सकती है.....अपना फैसला कुछ लोगों की हिंसा की वजह से बदल सकती है......ड़र सकती है......हक की बात नही कर सकती है.....क्योंकि ये भारत है यंहा कुछ भी हो सकता है...
