सोमवार, 2 जून 2008


नही लगता कि सज़ा कम है ?



विकास और विशाल यादव को नीतिश कटारा की हत्या का दोषी पाया गया....दफा ३०२ के तहत उन्हे दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत ने दोषी मानते हुए ताउम्र कैद की सज़ा सुनाई है....लेकिन जिस तरीके का जुर्म इन दोनों ने किया उसे रेयर ऑफ द रेयररेस्ट क्यों नही माना गया....हालांकि कोर्ट के फैसले पर कुछ लिखना बोलना ठीक नही क्योंकि जो कोर्ट ने किया वो सही है....लेकिन इन दोनों के साथ साथ डी पी यादव का रूतबा और विकास और विशाल का घमंड़ ज़रूर टूटा होगा...क्योंकि सभी का ये कहना कि अगर ये मामला उत्तर प्रदेश की किसी कोर्ट में चलता तो इन लोगों का कोई कुछ भी नही बिगाड़ सकता था....क्योंकि डी पी यादव का दबदबा कितना है सभी जानते है....लेकिन विकास यादव और विशाल को जब भी कोर्ट में लाया तो साफ तौलिये और दूधियां रंग के कपड़े शेव बनी हुई नहाए धोए लगते थे साथ में पुलिस वालों के साथ चलने में अपने आप को वो किसी सेलिब्रिटी से कम नही समझते थे.....और कोर्ट परिसर में पत्रकारों से मारपीट और बदतमीज़ी सभी ने देखी है....शायद ये पिता का रूतबा और पैसे का घमंड़ था.....लेकिन वो ये भूल गए कि घमंड़ तो रावण का भी नही रहा....अब जबकि निचली अदालत का फैसला उम्रकैद आ गया है....तब जाकर कंही डी पी यादव के चेहरे की हवाईयां भी उड़ी हुई दिखाई दी और उसके बददिमाग रईसज़ादों के चेहरे पर भी सारी उम्र जेल में रहने का ड़र सताने लगा...लेकिन उस मां ने अदालत के फैसले को सही ठहराया जिसमें कहा गया...उसके बेटे को ज़िंदा जलाने और इकलौटे बेटों को अपने गुस्से में आकर खत्म कर देने वालों को उम्रकैद लेकिन जब ये फैसला आया तो कोर्ट परिसर में कई लोग बोल उठे बच गए साले.....इनको तो लटका देना चाहिए था.....उस मां की भी जमकर तारीफ की गई....जिसने किसी बात की परवाह नही की और लड़ी पूरे सिस्टम से बाहुबलियों से लेकिन हार नही मानी....फिर धीरे धीरे सिस्टम मीडिया सब साथ हो लिए और जीत गई सच्चाई क्या लगता है आपको ये सज़ा काफी है एक सवाल जो पढ़े अपनी राय ज़रूर दें........

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