
14साल की आरूशी और उसके नौकर हेमराज की हत्या की गुत्थी सुलझने को ही नही आ रही....दिन ब दिन पेंच उलझता ही जा रहा है.....ऐसे में पुलिस की जांच पर सवालिया निशान लगे हुए है......सवाल जिनके जवाब पुलिस के पास नही है......
1पुलिस आरूशी की हत्या वाले दिन तलवार परिवार के घर पहुंची...तो सीधे नौकर हेमराज पर शक ज़ाहिर कर दिया.....और उसकी तलाश में कई राज्यों में टीमें लगा दी....लेकिन उसका शव उसी घर की छत पर अगले दिन पड़ा मिला.....
2नौकर का शव मिलने के बाद पुलिस का दावा कि ये मर्डर नौकर ने किया है ग़लत साबित हुआ और एक मर्डर कैस से ये सारा मामला दोहरे हत्याकांड़ में तबदील हो गया.....
३ उसके बाद पुलिस ने दूसरे नौकर विष्णु पर शक ज़ाहिर किया तो वो भी बेकसूर निकला....
4पुलिस ने कई दिन बीत जाने के बाद भी किसी को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की ज़हमत नही उठाई....जिससे हो सकता है वारदात करने वाले के मन से अब कानून और पुलिस का ड़र निकल गया हो....
5पुलिस ने डॉ तलवार के गैराज और क्लिनिक पर छापे मारने में करीब 5दिन से ज्यादा का समय ले लिया....
6पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में साफ आ गया कि ये काम किसी कसाई का या फिर डाक्टर का हो सकता है जिसने बड़े ही प्रोफेश्नल तरीके से ये हत्याए की है....कसाई की संभावना कम और डाक्टर की संभावना यंहा ज़्यादा दिखती है क्योंकि तलावर दंपति डाक्टर है......
7तलवार परिवार से पूछताछ करने में पुलिस सकुचाती रही...कई दिनों के बाद पूछताछ की गई वो भी बिना गिरफ्तारी या कम से कम हिरासत में लेकर वो ऐसा कर सकते थे.....
8पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का ब्यान आता है तलवार दंपति के ब्यानों में विरोधाभास है...क्या अंतर है...उस पर पुलिस ने क्या किया.....कोई कार्यवाही नही.....
9हत्या तेज़धार हथियारों से की गई....लेकिन इस वारदात में इस्तेमाल किए गए हथियारों का भी अभी तक कुछ पता नही......
10वो पलंग का गद्दा जिस पर आरूशी सो रही थी वो दूसरे की छत पर क्यों सुखाया अपनी छत पर क्यों नही क्या परिवार को पता था कि अपनी छत पर शव पड़ा है.....
11शव को छत पर घसीट कर ले जाया गया....करीब करीब एक ही वक्त पर दो लोगों की हत्या और परिवार को कुछ आवाज़ नही आई......जबकि पुलिस के मुताबिक दोनों कत्ल तलवार दंपति के साथ वाले कमरे में हुए......
12आरूशी और हेमराज के मोबाईल डिटेल निकालने का ख्याल पुलिस को करीब 4दिन बाद आया.....
13दोनों को मारने का तरीका बिल्कुल एक जैसा......मारने का वक्त करीब करीब एक जैसा....ऐसा नही हो सकता कि दोनों को एक साथ मारा हो....अगर एक एक कर के मारा होता तो चीखा चिल्ली ज़रूर हुई होती....
14आरूशी की मां का कहना है कि वो रात में आरूशी के कमरे को ताला लगाती थी इसकी क्या वजह थी....जब चाभी आरूशी की मां के पास होती थी तो रात में कैसे किसी ने ताला खोल लिया तोड़ा नही...और दंपति को पता तक नही चला.....
15क्यों पुलिस ने किसी को हिरासत में नही लिया.....क्यों पुलिस ने सख्ती नही दिखाई.....
16पुलिस भी मानती है कि लापरवाही तो हुई है तभी तो अपने एसपी और थाना प्रभारी का ट्रांस्फर और निलंबन किया.....लेकिन बावजूद उसके नतीजा ढांक के तीन पात
17पुलिस ने क्यों कहा कि दो दिन में कातिल सबके सामने होगा जबकि उसके पास एक सबूत तक मौजूद नही था....ऐसे में दो दिन बाद मुंह की खाने के बाद पुलिस को अंदाज़ा नही कि अपराधी के हौंसले कितने बढ़े होंगे.....
18इतिहास ग्वाह है किसी भी कैस को सुलझाने के लिए सबूतों की ज़रूरत होती है लेकिन यंहा ऐसा लगता है कि पुलिस पहले अपराधी को पकड़ना चाहती है.....और पुलिस को लगता है सबूत बाद में मिल जाएंगे.....
19 पोस्टमार्टम में आया है आरूशी के साथ बलात्कार नही हुआ है....और न ही नौकर ने शराब पी रखी थी.....अगर नौकर या उसके किसी साथी ने आरूशी को मारना होता तो वो रात में जब तलावर दंपति घऱ पर मौजूद थे तब क्यों कत्ल करते.....आरूशी के स्कूल की छुट्टियां थी और तलवार दंपति अपने काम से रोज़ बाहर जाते है....उनकी गैर मौजूदगी में वो वारदात को अंजाम देते
20ऐसा भी हो सकता है कि नौकर हेमराज या आरूशी में से किसी एक की हत्या करनी हो और दूसरे ने देख लिया हो और मजबूरन उसे भी मार देना पड़ा हो.....
ऐसे बीसीयों और सवाल है जिन्हे जल्द से जल्द पुलिस को सुलझाना होगा....और समय निकलता गया जैसे कि निकलता जा रहा है....तो अपराधी को पकड़ना मुशिकल ही नही नामुमकिन हो जाएगा...क्योंकि अपराधी वारदात के बाद ड़रा होता है लेकिन जैसे जैसे दिन बीतते जा रहे है वैसे वैसे कातिल से जो कोई ग़लतियां हुई भी होंगी वो ध्यान से उनसे पार पाता जा रहा होगा.....यंहा सवाल पुलिस की साख बचाने का नही है....यंहा अब सवाल है एक मासूम बच्ची को और उसके नौकर को कत्ल करने का उसकी वजह का और शातिर अपराधी को धर दबौंचने का.....हमेशा कहा जाता है कि अपराधी कोई न कोई सुराग छोड़ जाता है यंहा क्या सुराग छूट गया है उसे तलाशने की बेहद ज़रूरत है.....पुलिस की लापरवाही की हद या कहे कि जितनी किरकिरी होनी थी हो चुकी.....समझ में नही आता कि आखिर पुलिस ने क्यों दिखाई इतनी लापरवाही.....
1पुलिस आरूशी की हत्या वाले दिन तलवार परिवार के घर पहुंची...तो सीधे नौकर हेमराज पर शक ज़ाहिर कर दिया.....और उसकी तलाश में कई राज्यों में टीमें लगा दी....लेकिन उसका शव उसी घर की छत पर अगले दिन पड़ा मिला.....
2नौकर का शव मिलने के बाद पुलिस का दावा कि ये मर्डर नौकर ने किया है ग़लत साबित हुआ और एक मर्डर कैस से ये सारा मामला दोहरे हत्याकांड़ में तबदील हो गया.....
३ उसके बाद पुलिस ने दूसरे नौकर विष्णु पर शक ज़ाहिर किया तो वो भी बेकसूर निकला....
4पुलिस ने कई दिन बीत जाने के बाद भी किसी को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की ज़हमत नही उठाई....जिससे हो सकता है वारदात करने वाले के मन से अब कानून और पुलिस का ड़र निकल गया हो....
5पुलिस ने डॉ तलवार के गैराज और क्लिनिक पर छापे मारने में करीब 5दिन से ज्यादा का समय ले लिया....
6पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में साफ आ गया कि ये काम किसी कसाई का या फिर डाक्टर का हो सकता है जिसने बड़े ही प्रोफेश्नल तरीके से ये हत्याए की है....कसाई की संभावना कम और डाक्टर की संभावना यंहा ज़्यादा दिखती है क्योंकि तलावर दंपति डाक्टर है......
7तलवार परिवार से पूछताछ करने में पुलिस सकुचाती रही...कई दिनों के बाद पूछताछ की गई वो भी बिना गिरफ्तारी या कम से कम हिरासत में लेकर वो ऐसा कर सकते थे.....
8पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का ब्यान आता है तलवार दंपति के ब्यानों में विरोधाभास है...क्या अंतर है...उस पर पुलिस ने क्या किया.....कोई कार्यवाही नही.....
9हत्या तेज़धार हथियारों से की गई....लेकिन इस वारदात में इस्तेमाल किए गए हथियारों का भी अभी तक कुछ पता नही......
10वो पलंग का गद्दा जिस पर आरूशी सो रही थी वो दूसरे की छत पर क्यों सुखाया अपनी छत पर क्यों नही क्या परिवार को पता था कि अपनी छत पर शव पड़ा है.....
11शव को छत पर घसीट कर ले जाया गया....करीब करीब एक ही वक्त पर दो लोगों की हत्या और परिवार को कुछ आवाज़ नही आई......जबकि पुलिस के मुताबिक दोनों कत्ल तलवार दंपति के साथ वाले कमरे में हुए......
12आरूशी और हेमराज के मोबाईल डिटेल निकालने का ख्याल पुलिस को करीब 4दिन बाद आया.....
13दोनों को मारने का तरीका बिल्कुल एक जैसा......मारने का वक्त करीब करीब एक जैसा....ऐसा नही हो सकता कि दोनों को एक साथ मारा हो....अगर एक एक कर के मारा होता तो चीखा चिल्ली ज़रूर हुई होती....
14आरूशी की मां का कहना है कि वो रात में आरूशी के कमरे को ताला लगाती थी इसकी क्या वजह थी....जब चाभी आरूशी की मां के पास होती थी तो रात में कैसे किसी ने ताला खोल लिया तोड़ा नही...और दंपति को पता तक नही चला.....
15क्यों पुलिस ने किसी को हिरासत में नही लिया.....क्यों पुलिस ने सख्ती नही दिखाई.....
16पुलिस भी मानती है कि लापरवाही तो हुई है तभी तो अपने एसपी और थाना प्रभारी का ट्रांस्फर और निलंबन किया.....लेकिन बावजूद उसके नतीजा ढांक के तीन पात
17पुलिस ने क्यों कहा कि दो दिन में कातिल सबके सामने होगा जबकि उसके पास एक सबूत तक मौजूद नही था....ऐसे में दो दिन बाद मुंह की खाने के बाद पुलिस को अंदाज़ा नही कि अपराधी के हौंसले कितने बढ़े होंगे.....
18इतिहास ग्वाह है किसी भी कैस को सुलझाने के लिए सबूतों की ज़रूरत होती है लेकिन यंहा ऐसा लगता है कि पुलिस पहले अपराधी को पकड़ना चाहती है.....और पुलिस को लगता है सबूत बाद में मिल जाएंगे.....
19 पोस्टमार्टम में आया है आरूशी के साथ बलात्कार नही हुआ है....और न ही नौकर ने शराब पी रखी थी.....अगर नौकर या उसके किसी साथी ने आरूशी को मारना होता तो वो रात में जब तलावर दंपति घऱ पर मौजूद थे तब क्यों कत्ल करते.....आरूशी के स्कूल की छुट्टियां थी और तलवार दंपति अपने काम से रोज़ बाहर जाते है....उनकी गैर मौजूदगी में वो वारदात को अंजाम देते
20ऐसा भी हो सकता है कि नौकर हेमराज या आरूशी में से किसी एक की हत्या करनी हो और दूसरे ने देख लिया हो और मजबूरन उसे भी मार देना पड़ा हो.....
ऐसे बीसीयों और सवाल है जिन्हे जल्द से जल्द पुलिस को सुलझाना होगा....और समय निकलता गया जैसे कि निकलता जा रहा है....तो अपराधी को पकड़ना मुशिकल ही नही नामुमकिन हो जाएगा...क्योंकि अपराधी वारदात के बाद ड़रा होता है लेकिन जैसे जैसे दिन बीतते जा रहे है वैसे वैसे कातिल से जो कोई ग़लतियां हुई भी होंगी वो ध्यान से उनसे पार पाता जा रहा होगा.....यंहा सवाल पुलिस की साख बचाने का नही है....यंहा अब सवाल है एक मासूम बच्ची को और उसके नौकर को कत्ल करने का उसकी वजह का और शातिर अपराधी को धर दबौंचने का.....हमेशा कहा जाता है कि अपराधी कोई न कोई सुराग छोड़ जाता है यंहा क्या सुराग छूट गया है उसे तलाशने की बेहद ज़रूरत है.....पुलिस की लापरवाही की हद या कहे कि जितनी किरकिरी होनी थी हो चुकी.....समझ में नही आता कि आखिर पुलिस ने क्यों दिखाई इतनी लापरवाही.....
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मस्त है, लिखते रहो,
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